नेपाल सोशल मीडिया बैन से सड़कों पर बगावत: विरोध प्रदर्शनों के बीच नए प्रधानमंत्री की दौड़ तेज
नेपाल सोशल मीडिया बैन नेपाल सरकार का बड़ा फैसला
- 4 सितंबर को नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया।
- इसमें WhatsApp, Instagram, Facebook जैसे बड़े नाम शामिल थे।
- वजह: इन कंपनियों ने रेगुलेटरी कंप्लायंस पूरे नहीं किए।
- नेपाल में लोकल ऑफिस खोलना था।
- एक ग्रेवेन्स ऑफिसर नियुक्त करना था।
- सरकार जब चाहे किसी कंटेंट को हटवा सके।
नेपाल सोशल मीडिया बैन के खिलाफ युवाओं का गुस्सा
- NGO “हामी नेपाल” के नेता सुदन बुरंग ने डिस्कॉर्ड पर बातचीत शुरू की।
2. युवाओं और छात्रों को कॉलेज/स्कूल ड्रेस में पीसफुल प्रोटेस्ट करने के लिए बुलाया गया।
3. लेकिन यह प्रदर्शन हिंसक हो गया और 19 लोगों की मौत हो गई।
4. नेपाल की संसद में आग लगाई गई और हालात काबू से बाहर हो गए।
कर्फ्यू और इंडियन एडवाइजरी नेपाल सोशल मीडिया बैन
- काठमांडू समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगा।
- सड़कों पर आर्मी टैंक्स और सोल्जर्स तैनात।
- भारत सरकार ने अपने नागरिकों को नेपाल न जाने की एडवाइजरी जारी की।
- फ्लाइट्स, ट्रेन और बससेवाएँ कैंसिल हुईं।
स्रोत: India Today / Dailymotion — इस वीडियो में बताया गया है कि कैसे बालेन्द्र शाह (Balen Shah) ने मेयर रहते हुए सड़क-साफ़-सफाई, नदी संरक्षण, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने जैसे उदाहरण पेश किए, और किस तरह जन-आंदोलन उन्हें नए राजनीतिक नेतृत्व के रूप में देख रहा है।
असली वजह: करप्शन और लग्जरी लाइफस्टाइल
- नेपाल सोशल मीडिया बैन
- इंटरनेट पर #Nepokids ट्रेंड हुआ।
- इसमें खुलासा हुआ कि पॉलिटिशियंस के परिवार लग्जरी लाइफ जी रहे हैं:
- Rolex घड़ियाँ
- LV (Louis Vuitton) के बैग
- Cartier गिफ्ट्स
- यूरोप में छुट्टियाँ
जबकि नेपाल की Per Capita Income बेहद कम है (लगभग $1400 सालाना).
जनता ने पूछा कि नेताओं की इतनी संपत्ति कहां से आ रही है?
नेपाल सोशल मीडिया बैन प्रोटेस्ट में हिंसा और मौतें
- पुलिस ने टियर गैस, रबर बुलेट्स और असली गोलियाँ चलाईं।
- एक 12 साल के बच्चे समेत 19 की मौत हुई।
- 400 से ज्यादा लोग गंभीर हालत में।
- नेताओं के घर जलाए गए, पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी राजलक्ष्मी की मौत आग में हुई। नेपाल सोशल मीडिया बैन

नेपाल की वर्तमान स्थिति नेपाल सोशल मीडिया बैन
- नेपाल की संसद और राष्ट्रपति निवास पर प्रदर्शनकारियों ने कब्जा किया।
2. मिलिट्री कंट्रोल प्रभावी है, मार्शल लॉ लग चुका।
3. 26 से अधिक लोगों की मौत हो गई।
4. संसद भवन की दीवार फांदकर प्रदर्शनकारी अंदर घुस गए।
5. पुलिस की आंसू गैस और पानी की बौछार भी भीड़ को नहीं रोक सकी।
6. गृह मंत्री और पीएम ओली दोनों इस्तीफा दे चुके हैं।
नेपाल सोशल मीडिया बैन का बड़ा कारण
- सरकार की दलील: ये प्लेटफॉर्म्स फेक न्यूज़ और समाज में गंदगी फैला रहे थे।
- कंपनियों को नेपाल में लोकल ऑफिस खोलने और एक कंटेंट मॉनिटरिंग अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया गया था।
- सभी कंपनियों ने मना कर दिया, सिर्फ TikTok ने 7 दिनों के अंदर नियम मान लिए।
इसीलिए TikTok नेपाल में चालू है, जबकि भारत में बैन है।
विरोध के असली कारण नेपाल सोशल मीडिया बैन
लोग फेसबुक और ट्विटरबैन से नाराज़ नहीं है। असल गुस्सा इन वजहों से है
- भ्रष्टाचार – सरकारी ठेकों और नौकरियों में धांधली।
- भाई-भतीजावाद – नेताओं के पार्टी दफ्तर के बेटे-बेटियां बाहर अन्य देशों में ऐश कर रही हैं, जबकि जनता रोजगार के लिए तरसती रहती है।
- विदेशी दबाव – अमेरिका और चीन भी नेपाल पर अपनी दबंगई जमाना चाहते हैं।
- बेरोजगारी – दर 10% से अधिक।
सियासी अस्थिरता – 5 साल में 3 पीएम बदल चुके हैं।

पीएम पद की दौड़
नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की रेस में तीन नाम सबसे आगे हैं:
(A) बालेंद्र शाह (Balen Shah)
उम्र: 35 साल
पेशा: सिविल इंजीनियर
पढ़ाई: मास्टर्स भारत से (Structural Engineering)
2022 में काठमांडू मेयर बने (स्वतंत्र उम्मीदवार)
युवाओं और Gen Z की पहली पसंद
सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव
अगर ये पीएम बने तो भारत-नेपाल रिश्तों में मजबूती आ सकती है और चीन का प्रभाव कम हो सकता है।
(B) डॉ. सेंडुक रुई
उम्र: 71 साल
मशहूर नेत्र विशेषज्ञ, “God of Sight” नाम से फेमस
रेमन मैगसेसे और भारत का पद्मश्री अवॉर्ड प्राप्त
बुजुर्ग होने के कारण युवाओं में ज्यादा पॉपुलर नहीं।
(C) कुलमान घिसिंग
उम्र: 54 साल
नेपाल में बिजली संकट खत्म करने वाले “रोशनी के पुरोधा”
युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत, लेकिन अभी उतने बड़े राजनीतिक चेहरे नहीं।
भारत से तुलना
भारत के पड़ोसी देशों—श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार—में पहले ही सत्ता पलट और राजनीतिक अस्थिरता हो चुकी है।
# नेपाल अब उसी राह पर है।
लेकिन भारत का लोकतंत्र, संविधान और चार स्तंभ (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया) इतने मजबूत हैं कि यहां ऐसा होना मुश्किल है।
परिणाम
नेपाल में जो आज सभी कुछ हो रहा है, वह सिर्फ नेपाल सोशल मीडिया बैन के कारण नहीं बल्कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, नेपोटिज़्म और विदेशी दबाव की देन है।नेपाल में सोशल मीडिया बैन सिर्फ एक टेक्निकल पॉलिसी इश्यू नहीं रहा, बल्कि इसने जनता की आवाज़ दबाने की कोशिश को उजागर किया। इससे शुरू हुआ आंदोलन अब बड़े पॉलिटिकल क्राइसिस में बदल गया है।
- युवाओं ने बालेंद्र शाह को एक नया विकल्प माना है।
- स्पष्ट होगा आने वाले दिनों में कि नेपाल में सत्ता किसके पास जाती है।
- भारत के लिए इन घटनाओं को सीख है कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी सबसे मजबूत हथियार हैं।

