Zoho vs Microsoft: Zoho founder Sridhar Vembu का दावा – हम देते हैं बेहतर अनुभव!Swadeshi Tech Movement 2025
ZOHO के संस्थापक श्रीधर वेम्बु का दावा: “हम माइक्रोसॉफ्ट से बेहतर अनुभव देते हैं”
हाल ही में,ज़ोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने एक मजबूत बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा, “ज़ोहो का अनुभव माइक्रोसॉफ्ट से अधिक अच्छा है।” वेम्बु ने सोशल मीडिया (X) पर ज़ोहो और उसके सहायक ब्रांड ManageEngine की विकास यात्रा का मुकाबला पेश किया और आग्रह किया कि उपयोगकर्ता ज़ोहो की पेशकशों का मुकाबला माइक्रोसॉफ्ट से करें।
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Zoho vs Microsoft उनका यह बयान उसी समय आ रहा है, जब भारत सरकार “स्वदेशी”Swadeshi सॉफ़्टवेयर एवं टेक्नॉलॉजी को बढ़ावा दे रही है। हाल के समय में, भारत के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने दस्तावेज़, स्प्रेडशीट और प्रस्तुति कार्यों के लिए ज़ोहो प्लेटफ़ॉर्म अपनाने का ऐलान किया, और साथ ही जनता से भी इसे अपनाने का आग्रह किया।
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Sridhar Vembu ने इस सरकारी समर्थन की तारीफ की और इसे ज़ोहो इंजीनियर्स के लिए एक अच्छा मनोबल वृद्धि कहा।
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Zoho vs Microsoft: ज़ोहो और उसके दावे की पृष्ठभूमि
ज़ोहो — संक्षिप्त पूर्वावलोकन
- ज़ोहो कॉरपोरेशन एक भारतीय मल्टीनैशनल टेक्नॉलॉजी कंपनी है, जो क्लाउड-आधारित बिजनेस सॉफ्टवेयर (CRM, ERP, ऑफिस सूट, आदि) प्रदान करती है।
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- इसका एक सहायक ब्रांड है ManageEngine, जो आईटी प्रबंधन (IT management) समाधानों पर केंद्रित है।
- ज़ोहो की प्राथमिकता यह है कि वे छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMBs) के लिए एकीकृत समाधान प्रदान करना चाहते हैं, जिससे उन्हें विभिन्न उपकरणों को जोड़ने की आवश्यकता न पड़े।
- वेम्बू ने दावा किया कि चेन्नई स्थित यह सॉफ्टवेयर निर्माता “दुनिया की एकमात्र कंपनी है जो उत्पाद श्रृंखला की व्यापकता और गहराई में माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर दे सकती है।” Zoho vs Microsoft
- उनकी पोस्ट में ज़ोहो और उसके आईटी विभाग, मैनेजइंजीन, के 2002 से लेकर आज तक के विकास को दर्शाने वाला एक दृश्य शामिल था।अपने X Post में, वेम्बू ने लिखा: “2002 से आज तक ज़ोहो और मैनेजइंजीन की उत्पाद श्रृंखला में वृद्धि का एक अद्भुत दृश्य।
Zoho vs Microsoft: वेम्बु के दावे का सार
वेबसाइट पोस्ट और साझा दृश्य (visual) प्रस्तुत करते हुए, वेम्बु ने यह कहा:
- हम एकमात्र कंपनी हैं जो माइक्रोसॉफ्ट को उसकी उत्पाद श्रृंखला की चौड़ाई और गहराई (breadth and depth) के रूप में चुनौती पेश कर सकते हैं। हमारे उत्पाद माइक्रोसॉफ्ट की तुलना में बहुत अधिक अच्छे अनुभव प्रदान करते हैं। हम रियलिटी मार्केट का सामना करते हुए रिसर्च और डेवलपमेंट को दोगुना कर रहे हैं।” Zoho vs Microsoft
- इसका मतलब है कि ज़ोहो सिर्फ एक या दो उत्पाद नहीं बना रहा है लेकिन वह एक पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) की तरह विकसित हो रहा है — जिसमें मेल, दस्तावेज़, डेटा विश्लेषण, CRM, ERP, स्वचालन (automation), आदि।
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- वे विशेष रूप से इस बात पर जोर देते हैं कि ज़ोहो + ManageEngine की संयुक्त उत्पाद श्रृंखला विकास की दृष्टि से माइक्रोसॉफ्ट के बराबर या उससे आगे हो सकती है।
- हम क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्लेटफॉर्म, एआई और एप्लिकेशन में अनुसंधान एवं विकास पर दोगुना ध्यान दे रहे हैं, इसलिए आप हमसे और भी तेज़ नवाचार देखेंगे।” Zoho vs Microsoft
IT मंत्री अश्विनी वैष्णव का Zoho प्लेटफ़ॉर्म पर स्विच
हाल ही में भारतीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बहादुर और प्रतीकात्मक कर्म किया — उन्होंने अपनी ऑफिस और प्रस्तुति (documents, spreadsheets, presentations) कार्यों के लिए विदेशी सॉफ़्टवेयर से हटकर भारतीय स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म Zoho अपनाने का एलान किया।
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यह फैसला हमेशा सिर्फ एक व्यक्तिगत पसंद नहीं है, बल्कि “स्वदेशी” (indigenous) टेक्नोलॉजी का बढ़ावा देने की सरकार की दिशा और नरेंद्र मोदी जी के “लोकल पहले, स्वदेशी पहल” (Swadeshi) के दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह कदम न सिर्फ प्रतीकात्मक है, बल्कि संभावित तौर पर सरकारी और सार्वजनिक तंत्रों में टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता की नींव को मजबूत करने वाला हो सकता है।
सरकारी समर्थन और “स्वदेशी” टेक्नॉलॉजी का महत्व 2025
1. अश्विनी वैष्णव का ज़ोहो अपनाना
Zoho vs Microsoft: सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि वे दस्तावेज़, स्प्रेडशीट, प्रस्तुति आदि कार्यों के लिए ज़ोहो प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करेंगे।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “स्वदेशी” पहल के अनुरूप स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को अपनाएँ।
2. मनोबल एवं प्रेरणा
वेम्बु ने समर्थन पर कहा, यह ज़ोहो के इंजीनियर्स के लिए एक “बड़ा मनोबल” है, जिन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक इसकी उत्पाद श्रृंखला बनाई है।
3. तकनीकी आत्मनिर्भरता
भारत सरकार की नीति “Atmanirbhar Bharat” और स्वदेशी (Make in India) विचारधारा को हम ध्यान में रखते हुए, टेक्नॉलॉजी क्षेत्र में विदेशी निर्भरता घटाने का प्रयास जारी है। Zoho vs Microsoft: ज़ोहो जैसे घरेलू सॉफ्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म को बढ़ावा देना, देश की टेक्नोलॉजी संप्रभुता (sovereignty) को बढ़ावा दे सकता है।
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सम्भावित प्रभाव और दीर्घकालीन लाभ
Zoho vs Microsoft:अगर यह पहल सफलतापूर्वक लागू हो जाए, तो इसके अनेक प्रभाव हो सकते हैं:
- टेक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्मों की नम्र वधान्य वृद्धि होगी और अन्य सरकारी संस्थाओं को भी इस प्रकार के मार्गदर्शन मिलेगा।
- लोकल सॉफ़्टवेयर उद्यमों को बल
Zoho जैसे बैंकों और सरकारी ग्राहकों का भरोसा मिलेगा, जिससे उनका विकास और नवाचार बढ़ेगा।
- डेटा नियंत्रण और सुरक्षा बेहतर होगी
डेटा स्थानीय भंडारण और नियंत्रण की संभावना बढ़ेगी, जिससे साइबर सुरक्षा, गोपनीयता और सुशासन में होगा।
- कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव
जब पैसे विदेशी लाइसेंस और सब्सक्रिप्शन पर नहीं जाएंगे, बल्कि भारतीय टेक्नोलॉजी को मिलेंगे, तो यह पूंजी स्थानीय अर्थव्यवस्था में आएगी।
निष्कर्ष
श्रीधर वेम्बु का यह वक्तव्य — “हम माइक्रोसॉफ्ट से बेहतर अनुभव देते हैं” — न केवल आशावादी है बल्कि साहसिक विचार को सामने लाता है: कि भारतीय सॉफ़्टवेयर कंपनियाँ ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धा Zoho vs Microsoft: कर सकती हैं।
लेकिनं ऐसे दावों साबित करना आसान नहीं है। ज़ोहो को उच्च गुणवत्ता, विश्वसनीयता और ब्रॉड आंसर अब्यूरतता दिखानी होगी। अगर यदि वे सफल हो जाते हैं,Zoho vs Microsoft: तो भारत का सॉफ़्टवेयर उद्योग एक नए दौर में आएगा — जहां विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होगी और घरेलू नवाचार को सम्मान मिलेगा।
Zoho vs Microsoft: Sridhar Vembu का दावा – हमारा अनुभव सबसे बेहतर!
जानिए कैसे Zoho Microsoft से बेहतर अनुभव देता है। इस FAQ में हम Zoho के फायदे, अंतर और भारत में इसका महत्व विस्तार से बता रहे हैं।

